रविवार, 25 सितंबर 2011

परमार





सुबह - सुबह मेरे आंगन में , एक चिरैया आई 
वह  परमार के जन्म दिवस की , दे कर गई बधाई 

मैं बोली क्या तुझे पता है , कैसे थे यशवंत 
दिखला कर पंखों से करतब , फुर से उडी तुरंत 

जिसने निर्मित किया हिमाचल , पूरा राज्य दिलाया 
जो अस्तित्व हिमाचल का है,  सब है उसकी माया 

उड़ती हूँ बेधड़क यहाँ मैं , चुगती दाना पानी 
नहीं किसी से डरती , करती हूँ अपनी मनमानी  

नदिया , पर्वत , वन और झरने , सब हैं मुझे लुभाते 
मैं जो गीत सुनाती उनको , वही  गीत वे गाते 

आज भी समझा कर  आई हूँ , सब मिलजुल कर आओ 
जन्म दिन परमार का , मिल कर सभी मनाओ 

कहे ' आज़मी ' खूब कहा , तूने  हे चिड़िया रानी 
याद आ गई मुझको , उस नायक की रची कहानी 


सावित्री तिवारी 'आज़मी ' 

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