सुबह - सुबह मेरे आंगन में , एक चिरैया आई
वह परमार के जन्म दिवस की , दे कर गई बधाई
मैं बोली क्या तुझे पता है , कैसे थे यशवंत
दिखला कर पंखों से करतब , फुर से उडी तुरंत
जिसने निर्मित किया हिमाचल , पूरा राज्य दिलाया
जो अस्तित्व हिमाचल का है, सब है उसकी माया
उड़ती हूँ बेधड़क यहाँ मैं , चुगती दाना पानी
नहीं किसी से डरती , करती हूँ अपनी मनमानी
नदिया , पर्वत , वन और झरने , सब हैं मुझे लुभाते
मैं जो गीत सुनाती उनको , वही गीत वे गाते
आज भी समझा कर आई हूँ , सब मिलजुल कर आओ
जन्म दिन परमार का , मिल कर सभी मनाओ
कहे ' आज़मी ' खूब कहा , तूने हे चिड़िया रानी
याद आ गई मुझको , उस नायक की रची कहानी
सावित्री तिवारी 'आज़मी '
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