पुरुषों की इस दुनिया में , भगवान बनाई क्यों औरत .
कोमल अंगों -सुन्दरता से , भगवान सजाई क्यों औरत .
दी अग्नि परीक्षा सीता बन , द्रौपदी की गई अर्ध नग्न .
अस्मिता हनन करने को ही , भगवान बनाई क्यों औरत .
क्यों कोख में ही मारी जाती , बच जय तो दुत्कारी जाती .
केवल जिल्लत ही सहने को , भगवान बनाई क्यों औरत .
क्यों पाणिग्रहण जरूरी है , मां बनना क्यों मज़बूरी है .
पालन - पोषण ही करने को , भगवान बनाई क्यों औरत .
जब औरत दुःख की साथी है , सुख का अमृत बरसाती है .
तब दुःख ही सहने की खातिर , भगवान बनाई क्यों औरत .
सब कहते हैं - है देर नहीं , तेरे घर में अंधेर नहीं .
फिर अंधियारी रातों में ही , भगवान बनाई क्यों औरत .
जब औरत जग की जननी है , माँ -बहन- सुता और घरनी है .
फिर पुरुषों का माध्यम बनकर , भगवान सताई क्यों औरत .
क्या जतन ' आज़मी ' करे बता , हो गया बहुत ना और सता .
जब दया नहीं आती है फिर , भगवान बनाई क्यों औरत .
सावित्री तिवारी ' आज़मी '
excellent mam...i always get inspiration fromm u.God Bless..
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