रविवार, 18 सितंबर 2011

शिक्षक




बदल गया परिवेश अब , शिक्षक का भी मान कहाँ 
शिक्षक अब केवल शिक्षक है , अब उसका सम्मान कहाँ 

दर दर रहे भटकता , जीवन भर बदली के चक्कर में 
पूंजी पूरी हो जाती बस,  दूध चाय और शक्कर में
सपने में भी सुविधाओं का ,  मिले उसे सामान कहाँ 
शिक्षक अब केवल शिक्षक है , अब उसका सम्मान कहाँ 

गाड़ी बंगला दूरभाष पर ,  शिक्षक का अधिकार नहीं 
सूट बूट की तरफ देखना , भी उसको दरकार नहीं 
कुर्ता पायजामा और साईकिल , बिन उसका उद्धार कहाँ 
शिक्षक अब केवल शिक्षक है , अब उसका सम्मान कहाँ 

सर्वपल्ली राधाकृष्ण से , ज्ञान जो मिला विरासत में 
उसके ही निर्बहन के खातिर , फंसा हुआ है सांसत में 
सब कहते हैं अब उसमें , ज्ञान का वह  भंडार  कहाँ 
शिक्षक अब केवल शिक्षक है , अब उसका सम्मान कहाँ 

कहे ' आज़मी  ' कोशिश करते  , हैं फिर भी कुछ लोग यहाँ 
ढूंढ़ ढूंढ़ कर लाते हैं  , छिपे हैं गुरुवर जहाँ कहाँ 
बिना उन्हें सम्मान दिए ,  अपना भी है मान कहाँ 
शिक्षक अब केवल शिक्षक है , अब उसका सम्मान कहाँ 

सावित्री  तिवारी ' आज़मी ' 

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