बदल गया परिवेश अब , शिक्षक का भी मान कहाँ
शिक्षक अब केवल शिक्षक है , अब उसका सम्मान कहाँ
दर दर रहे भटकता , जीवन भर बदली के चक्कर में
पूंजी पूरी हो जाती बस, दूध चाय और शक्कर में
सपने में भी सुविधाओं का , मिले उसे सामान कहाँ
शिक्षक अब केवल शिक्षक है , अब उसका सम्मान कहाँ
गाड़ी बंगला दूरभाष पर , शिक्षक का अधिकार नहीं
सूट बूट की तरफ देखना , भी उसको दरकार नहीं
कुर्ता पायजामा और साईकिल , बिन उसका उद्धार कहाँ
शिक्षक अब केवल शिक्षक है , अब उसका सम्मान कहाँ
सर्वपल्ली राधाकृष्ण से , ज्ञान जो मिला विरासत में
उसके ही निर्बहन के खातिर , फंसा हुआ है सांसत में
सब कहते हैं अब उसमें , ज्ञान का वह भंडार कहाँ
शिक्षक अब केवल शिक्षक है , अब उसका सम्मान कहाँ
कहे ' आज़मी ' कोशिश करते , हैं फिर भी कुछ लोग यहाँ
ढूंढ़ ढूंढ़ कर लाते हैं , छिपे हैं गुरुवर जहाँ कहाँ
बिना उन्हें सम्मान दिए , अपना भी है मान कहाँ
शिक्षक अब केवल शिक्षक है , अब उसका सम्मान कहाँ
सावित्री तिवारी ' आज़मी '