जितनी हुई वेदना तुमको , इस दुनिया में लाने में I
उससे अधिक व्यथित हूँ , तुमको मंजिल तक पहुचाने में II
लाख किया कोशिश न निकले , एक भी आंसू उस पल में I
अब तो रहें बरसती आँखें , बिना बात भी पल- पल में II
जन्म की साथी ही बन पाई , यही काम था बस में मेरे I
अब तो करे विधाता निर्णय , क्या लिखा है भाग्य में तेरे II
किससे कंहूँ समझ ना आये , कौन करे कुछ हल्की पीड़ा I
किसमें है मानवता इतनी , थाम सके जो तेरी बीड़ा II
कहे ' आज़मी ' तू भी बन जा , मेरे जैसी हिम्मतवाली I
सहन शक्ति इस कदर बढ़ा ले , फिर कहलाये किस्मतवाली II
सावित्री तिवारी ' आज़मी '
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