मंगलवार, 13 नवंबर 2012

दीपावली

दीपों का त्यौहार दिवाली, आओ दीप जलाएं।
हर दिल को खुशियाँ बांटे, हर दिल में प्यार जगाएं।।
हो आदान प्रदान मिठाई, सब को दें सौगातें। 
मीठी मीठी याद रखें, बिसरा दें कड़वी बातें।। 
स्वागत करें लक्ष्मी का, वरदान चलो मिल मांगें। 
धन दौलत सुख शान्ति दें माँ, दुःख दर्रिद्दर भागें।। 
कहे  "आज़मी" मैं चाहूं, हर रोज़ दिवाली आये। 
मेह्मानो पकवानों संग, फुलझड़ियाँ दीप जलाएं।। 

सावित्री तिवारी "आज़मी"

शनिवार, 10 नवंबर 2012

धनतेरस

धनतेरस 
धनतेरस का पर्व है, लगी हुई है सेल। 
ठट्ठा मार कुबेर हँसे, लखि धरती का खेल।। 
लखि धरती का खेल, मची है आफरा तफरी। 
टूट पड़ रहे लोग, बनी है उनकी चकरी।। 
कोई सोना ले रहा, कोई मांगे चांदी। 
कोई मांगे बढ़िया बर्तन, कोई कपड़ा खादी।। 
कहे "आज़मी" सिर्फ देख कर, मैं तो हुई निहाल।
पैसा-पैसा जोड़ कर, कुच्छ लूंगी अगले साल।। 

सावित्री तिवारी "आज़मी"